भोजन के घटक: छठवीं विज्ञान


भोजन क्यों आवश्यक है?

सभी सजीव अर्थात पेड़ पौधे तथा जानवर को भोजन की आवश्यकता होती है। बिना भोजन के कोई भी सजीव नहीं रह सकता है। सभी सजीवों को जीवित रहने तथा कार्य करने के लिए उर्जा की आवश्यकता होती है, इस उर्जा को वे भोजन से प्राप्त करते हैं।

उर्जा के अलावे भी कई अन्य पदार्थ हमें देता है, जो हमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाता है तथा हमारे शरीर को विकसित होने में सहायक होता है।

पोषक तत्व क्या हैं

वैसे तत्व जो पोषण देते हैं, पोषक तत्व कहलाते हैं। पोषक तत्व मुख्यत: पाँच प्रकार के हैं। ये पोषक तत्व हैं कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन तथा खनिज।

भोजन के घटक क्या हैं

भोजन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों को भोजन के घटक कहते हैं। विभिन्न खाद्य पदार्थों में विभिन्न तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं।

भोजन के घटक मुख्यत: पाँच प्रकार के हैं, ये हैं कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन तथा खनिज। इनके अतिरिक्त हमारे भोजन में रूक्षांश तथा जल भी शामिल हैं, जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता है।

विभिन्न पोषक तत्व हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं

कार्बोहाइड्रेट

कार्बोहाइड्रेड मुख्य रूप से हमारे शरीर को उर्जा प्रदान करते हैं। सभी सजीवों को प्रतिदिन के कार्यों को करने के लिए इस उर्जा की आवश्यकता होती है।

कार्बोहाइड्रेट मुख्यत: मंड (Starch) तथा शर्करा [शुगर(Sugar)] के रूप में पाये जाते हैं। जैसे कि ग्लूकोज, जो कि एक प्रकार का शुगर है, तुरत उर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि धूप या भाग दौड़ के कारण अधिक थकान होने पर हम ग्लूकोज को जल में मिलाकर पीते हैं। ग्लूकोज हमें तुरत उर्जा प्रदान करता है। हमारा पाचन तंत्र कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन को ग्लूकोज में बदल देता ह, जो खून में मिलकर हमें उर्जा प्रदान करता है।

वैसे खाद्य पदार्थ जिनमें कार्बोहाइड्रेट बहुतायत में पाया जाता है, को उर्जा देने वाला भोजन (Energy giving food) कहा जाता है।

कार्बोहाइड्रेट के मुख्य श्रोत

हम प्रत्येक खाने में अनाज से बने हुए भोजन को अधिक मात्र में खाते हैं, जैसे कि रोटी, चावल, आलू इत्यादि। ये खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होता है।

सभी अनाज कार्बोहाइड्रेट के मुख्य श्रोत हैं। जैसे चावल, गेहूँ, मक्का, जौ इत्यादि।

कई तरह के फल तथा सब्जियाँ भी कार्बोहाइड्रेट के अच्छे श्रोत हैं, जैसे आलू, शकरकंड, केला इत्यादि।

अत: हमें कार्बोहाइड्रेट मुख्यरूप से अनाज, आलू, केला, चीनी आदि से प्राप्त होता है।

वसा

वसा भी हमें उर्जा प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेट की तुलना में वसा हमारे शरीर को अधिक उर्जा प्रदान करता है। लेकिन हमारा शरीर वसा से उर्जा कार्बोहाइड्रेट की अपेक्षा देरी से प्राप्त करता है क्योंकि वसा पाचन के क्रम में वसा का विघटन देरी से होता है।

चूँकि वसा भी हमें उर्जा प्रदान करता है अत: वसायुक्त भोजन को भी उर्जा देने वाला भोजन कहा जाता है।

भोजन के द्वारा ग्रहण किया गया आवश्यकता से अधिक कार्बोहाइड्रेट की मात्रा वसा के रूप में त्वचा के भीतर संरक्षित हो जाती है। इसी कारण से अधिक खाने वाले व्यक्ति अकसर मोटापे का शिकार हो जाते हैं।

भोजन के आभाव में हमारा शरीर संरक्षित वसा का उपयोग उर्जा प्राप्त करने के लिये करता है।

वसा हमारे शरीर के अंदरूनी अंगों को सुरक्षा भी प्रदान करता है। साथ ही वसा हमारे शरीर को गर्म भी रखता है।

वसा के मुख्य श्रोत

हम वसा पौधों तथा जांतव दोनों श्रोतों से प्राप्त करते हैं। पौधों से प्राप्त वसा के मुख्य श्रोत हैं, सरसों का तेल, मूँगफली का तेल, सूरजमुखी का तेल, नारियल का तेल आदि। तथा दूध से बने मक्खन तथा घी से प्राप्त होने वाले वसा जांतव श्रोत से आते हैं।

मीट, मछली, अंडे, दूध, घी, मक्खन, मूँगफली का तेल, सूरजमुखी का तेल, नारियल का तेल, सरसों का तेल आदि वसा के मुख्य श्रोत हैं।

प्रोटीन

प्रोटीन की आवश्यकता हमारे शरीर की बृद्धि तथा स्वस्थ्य रखने के लिए होती है।

जैसे एक घर को बहुत सारे ईंटों से मिलकर बना होता है, उसी तरह हमारा शरीर सेल (Cell) से बना होता है। अर्थात सेल (Cell) जिसे हिन्दी में कोशिका कहते हैं, हमारे शरीर की ईकाई है। सेल [Cell (कोशिका)] प्रोटीन से बना होता है, अत: हमारा शरीर भी प्रोटीन से बना होता है। हमारे बाल भी एक तरह के प्रोटीन से बना है जिसे केराटीन कहते हैं।

चूँकि सेल [Cell (कोशिका)] प्रोटीन से बना होता है अत: प्रत्येक नया सेल बनाने के लिए हमारे शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

इसके अलावे सेल की मरम्मत करने के लिए भी प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

बच्चे चूँकि तेजी से बढ़ते हैं, अत: बच्चों को अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार एक बीमार व्यक्ति को पुन: स्वस्थ होने के क्रम में क्षतिग्रस्त सेल को ठीक करने के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

यही कारण है कि डॉक्टर बीमार व्यक्ति को प्रोटीन की गोली या पाउडर देते हैं ताकि एक बीमार व्यक्ति जल्द ठीक हो सके।

यही कारण है कि प्रोटीनयुक्त भोजन को प्राय: 'शरीरवर्धक भोजन ' कहते हैं।

प्रोटीन के श्रोत

हमें प्रोटीन जंतु तथा पेड़ पौधों दोनों श्रोतों से प्राप्त होते हैं।

माँस, मछली, अंडे, दाल, सोयाबीन, बींस, आदि प्रोटीन के अच्छे श्रोत हैं।

एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन उसके वजन के प्रत्येक किलोग्राम के लिए एक ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। अर्थात यदि एक व्यक्ति का वजन 50 किलोग्राम है, तो उसे प्रतिदिन 50 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होगी।

विटामिन

विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। विटामिन हमारी आँख, हड्डियों, दाँतों, और मसूढ़ों को स्वस्थ रखने में भी सहायता करते हैं।

हालाकि, हमारे शरीर को विटामिन की बहुत थोड़ी मात्रा की आवश्यकता होती है, परंतु विटामिन हमारे शरीर के सही तरीके से कार्य करने के लिए अति आवश्यक है। किसी एक भी विटामिन के आभाव में हमारा शरीर बीमार पड़ सकता है।

विटामिन कई प्रकार के होते हैं। अबतक कुल बीस प्रकार के विटामिनों की खोज की जा चुके है। सभी विटामिन को अलग अलग नामों से जाना जाता है। जैसे कि विटामिन A, विटामिन C, विटामिन D, विटामिन E, तथा विटामिन K इसके साथ ही विटामिन B का ग्रूप। विटामिन B के ग्रूप को विटामिन B–कॉम्पलेक्स कहते हैं। विटामिन B–कॉम्पलेक्स में विटामिन B1, विटामिन B2, विटामिन B3, विटामिन B6 और विटामिन B12 होते हैं।

"विटामिन" शब्द लैटिन शब्द "विटा (Vita)" से आया है, जिसका अर्थ जीवन होता है। अत: विटामिन का अर्थ शरीर को जीवित रहने के लिए आवश्यक कार्य को करने में सहायता करने वाला होता है।

हमारे शरीर के लिए अलग अलग कार्य के लिए अलग विटामिन की आवश्यकता होती है।

उदाहरण : विटामिन A हमारी त्वचा तथा आँखों को स्वस्थ्य रखने में सहायता करता है।

विटामिन C हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने में सहायता करता है।

विटामिन D हमारी दाँतों और हड्डियों को स्वस्थ्य रखता है।

विटामिन के श्रोत

हम विटामिन केवल पौधों से प्राप्त करते हैं। जानवर विटामिन नहीं बनाते हैं।

दूध, मछली का तेल, पपीता, पालक, गाजर, आदि विटामिन A के अच्छे श्रोत हैं।

नारंगी, टमाटर, नींबू, अमरूद, तथा अन्य सभी खट्टे फल विटामिन C के अच्छे श्रोत हैं।

दूध, अंडे, मछली, आदि विटामिन D के अच्छे श्रोत हैं। सूर्य की रोशनी (धूप) में हमारा शरीर विटामिन बनाता है।

खनिज एवं लवण

हमारे शरीर के उचित विकास तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए खनिज लवण आवश्यक हैं।

खनिज लवण जो हमारे शरीर के लिए काफी आवश्यक हैं में से कुछ हैं सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, क्लोराइड, आयरन, फ्लोराइड, सल्फर, फॉस्फोरस तथा आयोडीन।

हालांकि हमारे शरीर को खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती है, लेकिन किसी भी एक खनिज लवण के उचित मात्रा के आभाव में हम बीमार हो सकते हैं।

उदाहरण

फॉस्फोरस तथा कैल्शियम हमारे दाँतों तथा हडिइयों को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक हैं। कैल्शियम हमारे हृदय को सुचारू रूप से काम करने में तथा खून को जमने में मदद करता है।

दूध, हरी शाक सब्जियाँ जैसे मटर, बींस आदि कैल्शियम के अच्छे श्रोत हैं जिनसे हमें कैल्शियम प्राप्त होता है।

आयोडीन के आभाव में 'घेघा रोग (Goitre)' हो जाता है। घेघा रोग से ग्रसित व्यक्ति के गले का अग्र माग फूल जाता है। कई कम्पनियां नमक में आयोडीन मिलाकर बेचती है, जिसे आयोडाइज्ड नमक कहा जाता है। इस नमक से हमें आयोडीन की सही मात्रा मिलती रहती है।

घरों में प्रयुक्त होने वाले नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड है।

आयरन हमारे खून में हीमोग्लोबीन बनाने में सहायता करता है। हीमोग्लोबीन के कारण ही हमारा खून लाल रंग का होता है। हीमोग्लोबीन की सहायता से ही ही खून फेफड़े से ऑक्सीजन लेकर हमारे शरीर के सभी भागों में पहुँचाता है। आयरन (लोहा) की कमी के कारण खून में हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाती है तथा इस बीमारी को 'अनेमिया [Anemia (खून की कमी)]' कहा जाता है। अनेमिया से ग्रसित व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है।

अंडे, माँस, हरी शाक सब्जियाँ, गाजर, अंकुरित अनाज आदि आयरन के अच्छे श्रोत हैं।

फ्लोरीन हमारे दाँतों के उपरि परत जिसे 'इनामेल (enamel)' कहते हैं को बनाता तथा मजबूत रखता है। यह हमारे दाँतों को सड़ने तथा खराब होने से रोकता है।

पोटैशियम हमारे शरीर को अच्छी तरह बढ़ने में सहायता करता है साथ ही यह हमारे खून तथा कोशिकाओं को स्वस्थ्य रखता है। पोटैशियम के आभाव में हमारी मशल्स [Muscles (माँशपेशियाँ)] कमजोर हो जाती हैं।

हरी तथा पीली सब्जियाँ पोटैशियम के अच्छे श्रोत हैं।

रूद्रांश या आहारी रेशे या डायटरी फाइवर

इन पोषक तत्वों के अतिरिक्त रूद्रांश [डायटरी फाइवर ((आहारी रेशे) Dietary fibres)] अर्थात पौधों से प्राप्त भोजन में पाये जाने वाले रेशे तथा जल भी हमारे शरीर को सही तरीके से कार्य करने के लिए अतिआवश्यक हैं। अत: भोजन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों से साथ साथ ही रूद्रांश [डायटरी फाइवर ((आहारी रेशे) Dietary fibres)] तथा जल भी पर्याप्त मात्रा में लिया जाना आवश्यक है।

रूद्रांश अर्थात आहारी रेशे या डायटरी फाइवर हमें पादप उत्पादों (पौधों से मिलने वाले भोजन) से मिलती है। साबूत अनाज, दाल, आलू, ताजे फल तथा सब्जियाँ रूद्रांश आहारी रेशे या डायटरी फाइवर के मुख्य श्रोत हैं।

रूद्रांश अर्थात आहारी रेशे या डायटरी फाइवर [Roughage or Dietary fibres] हमारे शरीर को कोई भी पोषक प्रदान नहीं करते हैं, फिर भी यह हमारे भोजन का आवश्यक अवयव है और यह भोजन का आयतन बढ़ा देते हैं।

रूद्रांश अर्थात आहारी रेशे या डायटरी फाइवर [Roughage or Dietary fibres] बिना पचे भोजन को बाहर निकाले में हमारे शरीर की सहायता करते हैं।

रूद्रांश अर्थात आहारी रेशे या डायटरी फाइवर [Roughage or Dietary fibres] कब्ज नहीं होने देता है तथा आँतों में भोजन के आगे बढ़ने की प्रक्रिया को ठीक तरह से बनाये रखता है।

जल

जल भोजन में उपस्थित पोषक तत्वों को अवशोषित करने में हमारे शरीर की सहायता करता है। जल कुछ अपशिष्ट पदार्थों, जैसे कि मूत्र तथा पसीने को शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है।

हमारे शरीर को जल की आवश्यकता होती है क्योंकि हमारे शरीर में होने वाली सभी प्रतिक्रियाएँ जैसे कि पाचन की प्रक्रिया तरल अवस्था में ही सम्पन्न होती है। जल ही पचे हुए भोजन को हमारे शरीर में बिभिन्न जगहों पर पहुँचाने में मदद करता है। शरीर से निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थ जैसे कि मूत्र तथा पसीना भी शरीर से तरल अवस्था में ही बाहर निकलता है। हमारा शरीर भी लगभग 70% जल से बना हुआ है। यहाँ तक कि हमारा खून भी तरल अवस्था में ही होता है।

सामान्यत: हमारे शरीर के जल की अवश्यकता उन वस्तुओं से प्राप्त होती जै जिन्हें हम द्रव के रूप में लेते हैं, जैसे कि जल, दूध, चाय, सूप, जूस आदि। इसके अतिरिक्त भोजन पकाते समय भी जल का प्रयोग किया जाता है। साथ ही फलों तथा सब्जियों में जल की मात्रा रहती है।

हमारे शरीर के लिए जल के मात्रा की आवश्यकता शरीर से निकलने वाले पसीने की मात्रा पर भी निर्भर होती है। गर्मी के दिनों में हमें अधिक जल की आवश्यकता होती है, क्योंकि गर्मी के दिनों में पसीना भी अधिक निकलता है।

डिहाइड्रोशन अर्थात निर्जलीकरण

शरीर से अधिक मात्रा में जल की हानि अर्थात निकलने की स्थिति को डिहाइड्रेशन [Dehydration (निर्जलीकरण)] कहा जाता है।

डायरिया [Diarrhoea (दस्त)], वोमिटिंग [vomiting (कय या उलटी)], लू लगने आदि की स्थिति में शरीर से अत्यधिक जल निकलने लगता है तथा शरीर में जल के आभाव में डिजाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन [Dehydration (निर्जलीकरण)] में माँसपेशियों में ऐंठन तथा कमजोरी हो जाती है। डिहाइड्रेशन [Dehydration (निर्जलीकरण)] एक मेडिकल आपातस्थिति होती है। यदि डिहाइड्रेशन [Dehydration (निर्जलीकरण)] का सयम पर उपचार नहीं किया जाय तो इससे मृत्यु भी हो सकती है। डिहाइड्रेशन [Dehydration (निर्जलीकरण)] होने की स्थिति में ओआरएस [ORS (ओरल रिहाइड्रेटेड शॉल्यूशन)], एक प्रकार की दवा दी जाती है। ओआरएस [ORS (ओरल रिहाइड्रेटेड शॉल्यूशन)] उपलब्ध नहीं रहने की स्थिति में चीनी तथा नमक का घोल दिया जाता है।

खाद्य में उपस्थित विभिन्न पोषक तत्वों के उपस्थिति की जाँच

मंड की उपस्थिति की जाँच

कार्बोहाइड्रेट कई प्रकार के होते हैं। हमारे भोजन में पाए जाने वाले मुख्य कार्बोहाइड्रेट, मंड [starch (स्टार्च)] तथा शर्करा [शुगर (sugar)] के रूप में होते हैं। किसी खाद्य पदार्थ में मंड [starch (स्टार्च)] है या नहीं, की जाँच आसानी से किया जा सकता है।

मंड [starch (स्टार्च)] की जाँच के लिए आवश्यक सामग्री

(a) आयोडीन का घोल (Iodine solution) [टिंचर आयोडीन के घोल में पानी मिलाकर आयोडीन के तनु घोल को तैयार किया जा सकता है।]

(b) उबले या कच्चे आलू का पेस्ट या चावल का पेस्ट या उस खाद्य पदार्थ की थोड़ी सी मात्रा जिसमें मंड के उपस्थिति की जाँच की जानी है।

(c) वॉच ग्लास या सीसे का एक प्लेट

(d) ड्रॉपर

मंड [starch (स्टार्च)] के उपस्थिति के जाँच की विधि

उबले हुए आलू या कच्चे आलू के पेस्ट की थोड़ी सी मात्र वॉच ग्लास में लिया।

इसमें ड्रॉपर की सहायता से आयोडीन के तनु घोल की दो या तीन बूँद डाला।

प्रेक्षण (ऑबजर्वेशन)

वॉच ग्लास में रखे हुए आलू के पेस्ट का रंग गहरा नीला (डार्क ब्लू) हो गया।

निष्कर्ष

आलू में मंड [स्टार्च (Starch)] उपस्थित है।

इसी तरह अन्य दिये गये खाद्य पदार्थ में मंड [स्टार्च (Starch)] के उपस्थिति की जाँच करें।

आलू के पेस्ट का गहरे नीले रंग में बदल जाना मंड [स्टार्च (Starch)] के उपस्थिति की पुष्टि करता है। यदि दिये गये खाद्य पदार्थ का रंग गहरे नीले रंग में नहीं बदलता है, तो उसमें मंड [स्टार्च (Starch)] उपस्थित नहीं है।

खाद्य पदार्थ में वसा के उपस्थिति की जाँच

खाद्य पदार्थ में वसा के उपस्थिति की जाँच के लिए आवश्यक सामग्री

(a) सफेद कागज का एक टुकड़ा

(b) तला हुआ आलू या केले का चिप्स या मक्खन की थोड़ी सी मात्रा।

विधि

(a) तले हुए आलू के चिप्स को उजले कागज में लपेटें।

(b) कागज को सावधानी से कूटें या हाथ से मसलें। कूटने या मसलने में सावधानी वरतें ताकि कागज नहीं फटे।

(c) कागज के टुकड़े को खोलकर चिप्स को हटाएं।

(d) कागज के टुकड़े को प्रकाश की ओर रखकर सावधानी से देखें।

प्रेक्षण (ऑबजर्वेशन)

कागज के टुकड़े पर एक आभासी धब्बा दिखाई दे रहा है।

निष्कर्ष

आलू के चिप्स में वसा उपस्थित है।

कागज के टुकड़े पर आभासी धब्बे का बनना आलू के चिप्स में वसा होने की पुष्टि करता है। यदि इस क्रियाकलाप में कागज के टुकड़े पर धब्बा नहीं बनता है, तो दिये गये खाद्य पदार्थ में वसा नहीं है।

इस प्रक्रिया को अन्य दिये गये खाद्य पदार्थों के साथ दुहराएं।

खाद्य पदार्थ में प्रोटीन के उपस्थिति की जाँच

खाद्य पदार्थ में प्रोटीन के उपस्थिति की जाँच के लिए आवश्यक सामग्री

(a) कॉपर सल्फेट का विलयन (100 एमएल पानी में दो ग्राम कॉपर सल्फेट को घोलकर कॉपर सल्फेट का विलयन तैयार किया जा सकता है।)

(b) कॉस्टिक सोडा का विलयन (100 एमएल जल में 10 ग्राम कॉस्टिक सोडा को घोलकर कॉस्टिक सोडा का विलयन तैयार किया जा सकता है।)

(c) दाल का पेस्ट

(d) ड्रॉपर

(e) परखनली

खाद्य पदार्थ में प्रोटीन के उपस्थिति की जाँच की विधि

(a) परखनली (टेस्ट ट्यूब) में दिये गये दाल के पेस्त की थोड़ी मात्रा लें।

(b) परखनली में थोड़ा सा पानी डालें।

(c) इसमें दो से तीन बूँद कॉपर सल्फेट का घोल ड्रॉपर की सहायता से डालें।

(d) इसमें लगभग 10 बूँद कॉस्टिक सोडा का घोल डालें।

(e) इसे अच्छी तरह मिलाएँ।

प्रेक्षण

परखनली के घोल का रंग बैगनी हो गया।

निष्कर्ष

दाल में प्रोटीन उपस्थित है।

घोल का बैगनी रंग में बदलना खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति को बतलाता है। यदि घोल बैगनी रंग में नहीं बदलता है तो दिये गये खाद्य पदार्थ में प्रोटीन नहीं है।

इस क्रियाकलाप को खाद्य पदार्थ के दिये गये अन्य नमूनों के साथ दोहराएँ।

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Reference:

NCERT Solution and CBSE Notes for class twelve, eleventh, tenth, ninth, seventh, sixth, fifth, fourth and General Math for competitive Exams. ©