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नवम गणित(Mathematics class Nine-Hindi Medium)

संख्या पद्धति (नवम गणित)

यदि किसी संख्या `r` को `p/q` के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p तथा q पूर्णांक हैं और q≠1 है, तो वह परिमेय संख्या (Rational Numbers) कहलाती है। परिमेय संख्याओं को भिन्न या भिन्न संख्या भी कहा जाता है।

सभी प्राकृतिक संख्या, यथा: 1, 2, 3, 4, 5, . . . . को `p/q` के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक है तथा q≠0. अत: सभी प्राकृतिक संख्याएँ परिमेय संख्या हैं।

उसी तरह सभी पूर्ण संख्याओं यथा 0, 1, 2, 3, 4, . . . . को `p/q` के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ, q≠0. अत: प्रत्येक पूर्ण संख्या एक परिमेय संख्या है।

उसी तरह चूँकि सभी पूर्णांकों (Integers) को `p/q` जहाँ q≠0 है के रूप में लिखा जा सकता है। अत: सभी पूर्णांक (Integers) परिमेय संख्या हैं।

जब हम यह कहते हैं कि `p/q` एक परिमेय संख्या है या जब हम `p/q` को एक संख्या रेखा पर निरूपित करते हैं, तब हम यह मान लेते हैं कि q≠0 और p और q का 1 के अतिरिक्त अन्य कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है, अर्थात p और q असहभाज्य संख्याएँ (co-prime numbers) हैं . . .

रेखाएँ और कोण

रेखाखंड [लाइन सेगमेंट (Line Segment)] : किसी रेखा का एक भाग जिसके दो अंत बिन्दु हों एक रेखाखंड [लाइन सेगमेंट (Line Segment)] कहलाता है। एक रेखाखंड को उसके दोनों अंत बिन्दुओं को साथ लिखकर उसके ऊपर एक क्षैतिज रेखा (बार) का चिन्ह लगाकर दर्शाया जाता है। जैसे कि `bar(AB)`

Ray: किसी रेखा का वह भाग जिसका एक अंत बिन्दु हो, एक किरण कहलाती है। एक रेखा को `vec(AB)` लिखकर दर्शाया जाता है।

संरेख बिन्दु तथा असंरेख बिन्दु [कोलिनियर प्वांइट तथा नॉन कोलिनियर प्वांइट (Collinear Points and Non-collinear Points)] : यदि तीन या अधिक बिन्दु एक ही रेखा पर स्थित हों, तो उन्हें संरेख बिन्दु [कोलिनियर प्वांइट्स (Collinear Points)] कहा जाता है, अन्यथा उन्हें असंरेख बिन्दु [नॉन कोलिनियर प्वांइट्स (Non-Collinear Points)] कहा जाता है।

कोण [एंगल (Angle)] : जब दो किरणें किसी एक ही बिन्दु से निकलती हैं, तो एक कोण बनता है। दूसरे शब्दों में जब दो किरणों का एक ही अंत बिन्दु होता है, तो एक कोण बनता है।

कोण की भुजाएँ तथा शीर्ष: कोण बनाने वाली किरणों को कोण की भुजाएँ कहते हैं। तथा दोनों किरणों के अंत बिन्दु, जहाँ वे मिलती हैं, को कोण का शीर्ष कहते हैं।

चतुर्भुज: 9 गणित

चार भुजाओं, चार कोणों और चार शीर्षों वाले बहुभुज को चतुर्भुज कहा जाता है। एक चतुर्भुज को अंग्रेजी में क्वाड्रिलैटरल (Quadrilateral) कहते हैं।

चतुर्भुज में आमाने सामने के शीर्षों को जोड़ने वाली रेखा को चतुर्भुज का विकर्ण [डायगनल्स (DIAGONALS)] कहा जाता है। एक चतुर्भुज में अधिकतम दो विकर्ण [डायगोनल्स (DIAGONALS)] हो सकते हैं।

चतुर्भुज के प्रकार [टाइप्स ऑफ क्वाड्रिलैटरल्स (Types of Quadrilateral)]

समांतर चतुर्भुज [पैरेलेलोग्राम (Parallelogram)] : चतुर्भुज जिसकी आमने सामने की भुजाएँ समांनांतर हों, को समांतर चतुर्भुज कहते हैं।

समांतर चतुर्भुज के गुण: (a) समांतर चतुर्भुज की आमने सामने की भुजाएँ (सम्मुख भुजाएँ) समानांतर होती हैं। (b) समांतर चतुर्भुज की आमने सामने की भुजाएँ (सम्मुख भुजाएँ) आपस में बराबर होती हैं। (c) समांतर चतुर्भुज के आमने सामने के कोण (सम्मुख कोण) आपस में बराबर होते हैं। (d) समांतर चतुर्भुज में आसन्न कोण सम्पूरक होते हैं। अर्थात समांतर चतुर्भुज के दो आसन्न कोणों का योग 1800 होता है। (e) समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को दो बराबर भागों में बाँटते हैं . . .

पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन

घन (क्यूब) क्या होता है?

घन (क्यूब) एक त्रिविमीय वस्तु होती है जिसमें छ: वर्गाकार फलक होते हैं। एक घन (क्यूब) के शीर्ष तीन फलकों के मिलने से बनता है। जैसे कि एक डाइस (पासा)। एक डाइस (पासा) घन का आदर्श उदाहरण है।

घन का क्षेत्रफल या घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल

चूँकि एक घन (क्यूब) के छ: वर्गाकार फलक होते हैं, अत: एक वर्गाकार फलक के क्षेत्रफल को छ: से गुणा करने पर घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल या घन का क्षेत्रफल की गणना की जाती है।

अब, एक वर्ग जिसका एक किनारा "a" है का क्षेत्रफल = a2

अत:, घन जिसका एक किनारा "a" है का क्षेत्रफल = 6 × a2

अत: घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6 a2

घनाभ (क्यूब्याड)

एक घनाभ (क्यूब्याड) छ: आयताकार फलक वली एक त्रिवीमिय वस्तु होती है, जिसके होते हैं। ईंट और माचिस की डिब्बी घनाभ (क्यूब्याड) का आदर्श उदाहरण है।

घनाभ का शाब्दिक अर्थ है, वैसी वस्तु जिसका आकार घन के जैसा हो . . .