पदार्थ: धातु और अधातु

आठवीं विज्ञान

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अधातु के रासायनिक गुण

अधातु का ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

सल्फर का ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

जब सल्फर को हवा में जलाया जाता है, तो सल्फर डाइऑक्साइड बनता है।

सल्फर (S) + ऑक्सीजन (O2) ⟶ सल्फर डाइऑक्साइड (SO2)

जब सल्फर डाइऑक्साइड को जल में घोला जाता है, तो सल्फ्यूरस अम्ल बनता है।

सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) + जल (H2) ⟶ सल्फ्यूरस अम्ल (H2SO3)

चूँकि सल्फ्यूरस अम्ल एक अम्ल है, अत: यह नीले लिटमस पेपर को लाल रंग में बदल देता है।

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अधातु के ऑक्साइड के गुण

अधातुओं के ऑक्साइड प्राय: आम्लिक होते हैं। .

फॉस्फोरस का ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया

जब फॉस्फोरस जो एक अधातु है, को हवा में छोड़ दिया जाता है, तो यह जलने लगता है। तथा इस प्रतिक्रिया में यह फॉस्फोरस का ऑक्साइड बनाता है।

चूँकि फॉस्फोरस ऑक्सीजन के साथ अति क्रियाशील है, अत: फॉस्फोरस को जल में संग्रहित किया जाता है।

अधातुओं का जल के साथ प्रतिक्रिया

अधातु प्राय: जल के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते हैं।

अधातुओं का अम्ल के साथ प्रतिक्रिया

अधातु प्राय: अम्ल के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते हैं।

अधातु का क्षार के साथ प्रतिक्रिया

अधातु क्षार के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, परंतु ये प्रतिक्रिया जटिल होते हैं। अत: इन प्रतिक्रियाओं का पाठन उच्च क्लास में होता है।

विस्थापन अभिक्रियाएँ

अधिक क्रियाशील धातु द्वारा धातु के यौगिक से कम क्रियाशील धातु का विस्थापन किया जाना विस्थापन अभिक्रिया या विस्थापन प्रतिक्रिया कहलाता है।

उदाहरण

जिंक का कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन के साथ प्रतिक्रिया।

जब जिंक धातु को कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में डाला जाता है, तो कॉपर अलग हो जाता है तथा जिंक सल्फेट बनता है।

कॉपर सल्फेट (CuSO4) + जिंक (Zn) ⟶ जिंक सल्फेट (ZnSO4) + कॉपर(Cu)

इस अभिक्रिया में जिंक मेटल कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है जिसके कारण जिंक कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है।

लोहे के कील का कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन से अभिक्रिया

जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में डाला जाता है, तो कॉपर अलग हो जाता है तथा आयरन सल्फेट बनता है।

कॉपर सल्फेट (CuSO4) + आयरन (Fe) ⟶ आयरन सल्फेट (FeSO4) + कॉपर (Cu)

इस अभिक्रिया में आयरन कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। अत: आयरन कॉपर सल्फेट के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है।

कॉपर का ज़िंक सल्फेट के जलीय विलयन के साथ अभिक्रिया

जब कॉपर को जिंक सल्फेट के जलीय विलयन में डाला जाता है, तो कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है।

जिंक सल्फेट (ZnSO4) + कॉपर (Cu) 𘞆 कोई प्रतिक्रिया नहीं

चूँकि कॉपर जिंक से कम अभिक्रियाशील है, अत: कॉपर जिंक सल्फेट के विलयन से जिंक को विस्थापित नहीं कर पाता है।

धातु तथा अधातु के उपयोग

धातु के कुछ उपयोग

(a) लोहे के अघातवर्धनीय तथा कठोर होने के कारण इसका उपयोग पानी के जहाज, हवाईजहाज, रेल के डिब्बे, रेल की पटरियों, पुलों के गार्टर आदि बनाने में किया जाता है।

(b) एल्युमिनियम तथा कॉपर जैसे धातु का उपयोग बिजली के तार बनाने में होता है। क्योंकि धातु तन्य तथा विद्युत के सुचालक होते हैं।

(c) एल्युमिनियम तथा कॉपर जैसे धातु का उपयोग खाने बनाने के बर्तन बनाने में किया जाता है। क्योंकि धातु अघातवर्धनीय तथा उष्मा के सुचालक होते हैं।

(d) चमकीले, अघातवर्धनीय तथा तन्य होने के कारण सोने तथा चाँदी का उपयोग गहने बनाने में होता है।

अधातुओं के कुछ उपयोग

(a) अधातु जीवन के लिए आवश्यक तत्व हैं। ऑक्सीजन जो कि एक अधातु है, को जीव जंतु श्वास के द्वारा लेते हैं। बिना ऑक्सीजन के जीव जंतु जीवित नहीं रह सकते हैं।

(b) अधातु जैसे कि नाइट्रोजन का उपयोग खाद बनाने में होता है। खाद का उपयोग खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में होता है।

(c) अधातु जैसे कि कार्बन का उपयोग जल के शुद्धिकरण में होता है।

(e) आयोडीन, जो कि एक अधातु है, के घोल का उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में कटे, छिले तथा घावों के ऊपर लगाने में किया जाता है।

(f) फॉस्फोरस का उपयोग पटाखे बनाने तथा दिया सलाई बनाने में किया जाता है।

सारांश

(1) पदार्थों का वर्गीकरण

भौतिक तथा रासायनिक गुणों के आधार पर पदार्थ को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है। (a) धातु तथा (b) अधातु

(2) धातु तथा अधातु के भौतिक गुण

(a) धातु प्राय: कठोर, अघातवर्धनीय, तन्य, अनुनादी, चमकीले, विद्युत और उष्मा के सुचालक तथा उच्च गलणांक तथा क्वथनांक वाले होते हैं।

(b) जबकि अधातु प्राय: मुलायम, अ-अघातवर्धनीय, अ-तन्य, अनुनादी नहीं, चमकीले सतह वाले नहीं, विद्युत तथा उष्मा के कुचालक तथा निम्न गलनांक तथा क्वथनांक वाले होते हैं।

धातु और अधातुओं में अपवाद

(a) धातु कठोर होते हैं, लेकिन धातु जैसे सोडियम और लिथीयम काफी मुलायम होते हैं। ये इतने मुलायम होते हैं कि इन्हें किसी चाकू की मदद से भी आसानी से काटा जा सकता है।

(b) धातु ठोस होते हैं। परंतु पारा (मरकरी) एक ऐसा धातु है जो कमरे के तापमान पर तरल होता है।

(c) अधातु कठोर नहीं होते हैं। लेकिन हीरा जो कि कार्बन का एक रूप है तथा एक अधातु है, प्राकृतिक में अबतक पाया जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ है।

(c) अधातु चमकीले नहीं होते हैं। लेकिन ग्रेफाइट जो कि कार्बन का एक रूप है तथा एक अधातु है, काफी चमकीला होता है।

(d) आयोडीन एक अधातु होते हुए भी चमकीला होता है।

(e) अधातु विद्युत के कुचालक होते हैं, पर ग्रेफाइट जो कि एक अधातु कार्बन का ही एक अपरूप है, विद्युत का सुचालक है।

धातु और अधातु के रासायनिक गुण

धातु तथा अधातु का ऑक्सीजन से अभिक्रिया

अधिकांश धातु ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया कर संबंधित ऑक्साइड बनाते हैं।

धातु + ऑक्सीजन ⟶ धातु के ऑक्साइड

अधिकांश अधातु ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया कर संबंधित अधातु के ऑक्साइड बनाते हैं।

अधातु + ऑक्सीजन ⟶ अधातु के ऑक्साइड

धातु तथा अधातु के ऑक्साइड के गुण

धातु के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं जबकि अधातुओं के ऑक्साइड आम्लिक होते हैं।

धातुओं और अधातुओं का जल के साथ अभिक्रिया

कुछ धातु जल के साथ अभिक्रिया कर संबंधित हाइड्रोक्साइड बनाते हैं। कुछ धातु जैसे लेड, कॉपर, सिल्वर, गोल्ड आदि जल के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। हालाँकि जब कॉपर अधिक दिनों तक नमीयुक्त हवा के सम्पर्क में रहता है तो उसपर एक हरे रंग की पतली परत जम जाती है। यह हरे रंग की परत कॉपर हाइड्रोक्साइड तथा कॉपर कार्बोनेट का मिश्रण होता है।

प्राय: अधातु जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता है।

धातु और अधातु का एसिट के साथ अभिक्रिया

धातु एसिड के अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस बनाता है।

प्राय: अधातु एसिड के साथ अभिक्रिया नहीं करता है।

धातु तथा अधातुओं का क्षार के साथ अभिक्रिया

धातु क्षार के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देता है।

अधातु भी क्षार के साथ अभिक्रिया करता है परंतु ये अभिक्रियाएँ अधिक जटिल होती हैं इसलिए उच्च कक्षा में पढ़ायी जाती हैं।

विस्थापन अभिक्रिया

अधिक अभिक्रियाशील मेटल द्वारा कम अभिक्रियाशील मेटल के यौगिक के जलीय घोल से कम अभिक्रियाशील मेटल को विस्थापित करना विस्थापन अभिक्रिया कहलाता है।

धातु तथा अधातु के उपयोग

धातु के कुछ उपयोग

(a) लोहे के अघातवर्धनीय तथा कठोर होने के कारण इसका उपयोग पानी के जहाज, हवाईजहाज, रेल के डिब्बे, रेल की पटरियों, पुलों के गार्टर आदि बनाने में किया जाता है।

(b) एल्युमिनियम तथा कॉपर जैसे धातु का उपयोग बिजली के तार बनाने में होता है। क्योंकि धातु तन्य तथा विद्युत के सुचालक होते हैं।

(c) एल्युमिनियम तथा कॉपर जैसे धातु का उपयोग खाने बनाने के बर्तन बनाने में किया जाता है। क्योंकि धातु अघातवर्धनीय तथा उष्मा के सुचालक होते हैं।

(d) चमकीले, अघातवर्धनीय तथा तन्य होने के कारण सोने तथा चाँदी का उपयोग गहने बनाने में होता है।

अधातुओं के कुछ उपयोग

(a) अधातु जीवन के लिए आवश्यक तत्व हैं। ऑक्सीजन जो कि एक अधातु है, को जीव जंतु श्वास के द्वारा लेते हैं। बिना ऑक्सीजन के जीव जंतु जीवित नहीं रह सकते हैं।

(b) अधातु जैसे कि नाइट्रोजन का उपयोग खाद बनाने में होता है। खाद का उपयोग खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में होता है।

(c) अधातु जैसे कि कार्बन का उपयोग जल के शुद्धिकरण में होता है।

(e) आयोडीन, जो कि एक अधातु है, के घोल का उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में कटे, छिले तथा घावों के ऊपर लगाने में किया जाता है।

(f) फॉस्फोरस का उपयोग पटाखे बनाने तथा दिया सलाई बनाने में किया जाता है।

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Reference: