जैव प्रक्रम - क्लास दसवीं विज्ञान

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एनसीईआरटी अभ्यास प्रश्नों के हल

प्रश्न संख्या (1) मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है

(a) पोषण

(b) श्वसन

(c) उत्सर्जन

(d) परिवहन

उत्तर (c) उत्सर्जन

ब्याख्या: मनुष्यों में दो वृक्क (किडनी) होते हैं जो रक्त में उपस्थित नाइट्रोजन युक्त शरीर के लिए अनावश्यक पदार्थों का छनन कर उसे मूत्र के रूप में उत्सर्जित कर देते हैं।

प्रश्न संख्या (2) पादप में जाइलम उत्तरदायी है

(a) जल का वहन

(b) भोजन का वहन

(c) अमीनो अम्ल का वहन

(d) ऑक्सीजन का वहन

उत्तर: (a) जल का वहन

ब्याख्या: पादप जल तथा अन्य खनिज लवण मिट्टी से जड़ों के द्वारा अवशोषण कर प्राप्त करता है। जाइलम पादपों के पूरे भाग में, जड़ से लेकर तने तथा पत्तियों तक, फैला हुआ महीन केशिकाओं का जाल होता है। जाइलम के द्वारा पादप मिट्टी से जल का अवशोषण कर सभी भागों तक पहुँचाता है। जाइलम में जल आदि का परिवहन एक ही ओर अर्थात नीचे से ऊपर की ओर होता है।

प्रश्न संख्या (3) स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है

(a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल

(b) क्लोरोफिल

(c) सूर्य का प्रकाश

(d) उपरोक्त सभी

उत्तर (d) उपरोक्त सभी

ब्याख्या: स्वपोषी पोषण पादपों में होता है। पादप की पत्तियों में क्लोरोफिल पाया जाता है। क्लोरोफिल एक हरे रंग का पदार्थ होता है, जिसके कारण पत्तियों का रंग हरा होता है। पादप वायुमंडल से पत्तियों में उपस्थित रन्ध्रों (स्टोमाटा) द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड तथा मिट्टी से जल जड़ों के द्वारा अवशोषण कर जल प्राप्त करते हैं। इसके बाद सूर्य की प्रकाश से उर्जा प्राप्त कर भोजन का संश्लेषण करते हैं। पादपों में भोजन के संश्लेषण की यह प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है। पादपों द्वारा स्वंय भोजन का संश्लेषण कर पोषक तत्व प्राप्त करना स्वपोषी पोषण कहलाता है।

प्रश्न संख्या (4) पायरूवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा उर्जा देता है और यह क्रिया होती है

(a) कोशाद्रव्य

(b) माइटोकॉंड्रिया

(c) हरित लवक

(d) केन्द्रक

उत्तर (b) माइटोकॉंड्रिया

ब्याख्या: जटिल जीव, यथा मनुष्य, भोजन से प्राप्त ग्लूकोज के विखंडल से उर्जा प्राप्त करते हैं। उर्जा प्राप्त करने के लिए प्रथम चरण में ग्लूकोज का विघटन पायरूवेट में होता है। पायरूवेट का विघटन उष्माक्षेपी (Exothermic) है। अत: इसमें उर्जा निकलती है। तथा इससे प्राप्त उर्जा ATP (Adenosine triphosphate) के रूप में संरक्षित हो जाती है, जिसे आवश्यकतानुसार छोड़ा जाता है। श्वसन का यह प्रक्रम माइटोकॉन्ड्रिया में संपन्न होता है। चूँकि माइटोकॉन्ड्रिया, जो कोशिका (cell) के अंदर होती है, तथा इससे उर्जा प्राप्त होती है, अत: इसे कोशिका का उर्जा घर (पावर हाऊस) [Power house of cell] कहा जाता है।

प्रश्न संख्या (5) हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?

उत्तर

क्षुद्रांत्र में भोजन के पहुँचने पर अग्नाशय से अग्नाशयिक रस प्राप्त करता है। अग्नाशयिक रस में एक प्रकार पाचक एंजाइम, जिसे लाइपेज कहलाता है, पाया जाता है। लाइपेज वसा पर क्रिया कर वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिशरॉल में बदल देता है। इस प्रकार वसा का पाचन होता है।

वसा के पाचन का प्रक्रम क्षुद्रांत्र में होता है।

प्रश्न संख्या (6) भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?

उत्तर: भोजन को चबाने के क्रम में मुँह में उपस्थित लाला–ग्रंथियाँ, लाला रस का स्त्रावण करती है। लाला रस को लार या स्लाइवा भी कहा जाता है।

लार या स्लाइवा भोजन में मिलकर भोजन को लसलसा बना देता है, जिससे भोजन को निगलने में आसानी होती है। लार या स्लाइवा भोजन में उपस्थित ग्लूकोज पर क्रिया कर उसे स्टार्च में बदल कर भोजन के पाचन में सहयोग करता है।

प्रश्न संख्या (7) स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन सी हैं और उसके उपोत्पाद क्या हैं?

उत्तर स्वयं के द्वारा बनाये गये भोजन से पोषक तत्वों की प्राप्ति, स्वपोषी पोषण कहलाता है। हरे पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा स्वयं के भोजन का संश्लेषण करते हैं।

स्वपोषी पोषण के लिए क्लोरोफिल, सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल एवं खनिज लवण का होना आवश्यक है। किसी एक की भी अनुपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया संपन्न नहीं होती है।

स्वपोषी पोषण के लिए भोजन के संश्लेषण में ऑक्सीजन एक उपोत्पाद (बाइप्रोडक्ट) होता है, जिसे प्रकाश संश्लेषण के समय पादपों द्वारा बाहर हवा में उत्सर्जित कर दिय जाता है।

प्रश्न संख्या (8) वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर हैं? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।

उत्तर जंतु श्वसन की प्रक्रिया द्वारा पोषक तत्वों में उपस्थित ग्लूकोज से उर्जा प्राप्त करते हैं।

वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में अंतर
वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन
(क) हवा की उपस्थिति में होने वाला श्वसन वायवीय श्वसन कहलाता है। हवा की अनुपस्थिति में होने वाला श्वसन अवायवीय श्वसन कहलाता है।
(ख) वायवीय श्वसन में अधिक उर्जा निकलती है। अवायवीय श्वसन में वायवीय श्वसन की तुलना में काफी कम उर्जा निकलती है।
(ग) वायवीय श्वसन में ग्लूकोज का पूर्ण विघटन होता है। अवायवीय श्वसन में ग्लूकोज का आंशिक विघटन होता है।
(घ) वायवीय श्वसन में जल एक उत्पाद होता है। हमारे पेशियों में कभी कभी होने वाले अवायवीय श्वसन में लैक्टिक अम्ल एक उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। तथा यीस्ट में होने वाले अवायवीय श्वसन में इथेनॉल एक उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।

अवायवीय श्वसन यीस्ट में तथा कुछ बैक्टीरीया में होता है। अवायवीय श्वसन कभी कभी हमारी पेशियों में हवा के आभाव में होता है।

प्रश्न संख्या (9) गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?

उत्तर

श्वास मार्ग फुफ्फुस के अंदर जाकर छोटी छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाती हैं, इन नलिकाओं के अंत में छोटे छोटे गुब्बारे जैसी कई आकृतियाँ होती हैं, जो कूपिकाएँ (Alveoli) कहलाती हैं। ये कूपिकाएँ (Alveoli) श्वास के साथ जाने वाली हवा तथा फुफ्फुस में आने वाले रक्त को अधिक क्षेत्रफल उपलब्ध कराती हैं ताकि गैसों का विनिमय अधिकतम हो सके।

प्रश्न संख्या (10) हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर

हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन युक्त रक्त का परिवहन करता है।

हीमोग्लोबिन की कमी होने से

(क) ऑक्सीजन युक्त रक्त पर्याप्त मात्रा में सभी कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पायेगा।

(ख) ऑक्सीजन युक्त रक्त पर्याप्त मात्रा में सभी जगह नहीं पहुँचने के कारण हमारे शरीर में श्वसन अच्छी तरह नहीं हो पायेगा और हमें आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त उर्जा प्राप्त नहीं हो पायेगी।

(ग) पर्याप्त उर्जा नहीं मिलने से हमारा शरीर किसी भी कार्य को पूरी दक्षता से नहीं कर पायेगा और हमें हमेशा थकान महसूस होगी।

(घ) हीमोग्लोबीन की शरीर में कमी होने की स्थिति को एक बीमारी अनिमिया (रक्त की कमी या लाल रक्त की कमी) कहा जाता है।

प्रश्न संख्या (11) मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की ब्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?

उत्तर

मानव तथा अन्य स्तनपायी एवं जटिल जंतुओं में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रक्त अलग अलग रक्त नलिकाओं द्वारा हृदय में जाता है, अर्थात दो बार में हृदय में पहुँचता है। रक्त के अगल अलग अर्थात दो बार में हृदय में पहुँचने के कारण इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं।

चूँकि मानव तथा अन्य जटिल जंतुओं को अधिक उर्जा की आवश्यकता होती है, अत: दोहरा परिसंचरण के कारण अधिक मात्रा में ऑक्सीजन कोशिकाओं में पहुँचता है जिससे वायवीय श्वसन होता है तथा ग्लूकोज का पूर्ण विघटन होने से अधिक उर्जा प्राप्त होती है।

अत: मानव सहित अन्य वार्म ब्लड जंतुओं के लिए दोहरा परिसंचरण आवश्यक हो जाता है।

प्रश्न संख्या (12) जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?

उत्तर

जाइलम तथा फ्लोएम मे पदार्थों के वहन में अंतर
जाइलम फ्लोएम
(क) जाइलम पादपों में जल का परिवहन जड़ से लेकर पादप के अन्य भागों तक करता है। फ्लोएम पत्तियों जहाँ पादप द्वारा भोजन का संश्लेषण किया जाता है से पोषक़ तत्वों का परिवहन अन्य सभी भागों तक करता है।।
(ख) जाइलम में परिवहन एक ही ओर अर्थात केवल नीचे से ऊपर की ओर होता है।। फ्लोएम के द्वारा पादपों में पोषक तत्वों का परिवहन आवश्यकता के अनुसार दोनों दिशाओं में होता है।

प्रश्न संख्या (13) फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए।

उत्तर

फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना
कूपिकाएँ वृक्काणु
(क) फुफ्फुस में पायी जाती हैं। वृक्क में पाये जाते हैं ।
(ख) केवल एक नलिकाओं द्वारा गैसों का आदान प्रदान होता है। अशुद्ध रक्त एक नलिका द्वारा जाती हैं तथा वर्ज्य पदार्थ दूसरी नलिका द्वारा मूत्र के रूप में मूत्राशय में पहुँचती हैं, अर्थात दो प्रकार की नलिकाओं से जुड़ी रहती हैं।
(ग) गोल गुब्बारे जैसी आकृति कूपिकाएँ (Alveoli) कहलाती हैं। गोल गुबारे जैसी आकृति बोमन संपुट (Bowmans Capsule) कहलाती हैं।
(घ) रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड को अलग करती हैं। रक्त से नाइट्रोजन युक्त वर्ज्य पदार्थों को अलग करता है।
(च) रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड को विसरण द्वारा अलग किया जाता है। रक्त से नाइट्रोजन युक्त वर्ज्य पदार्थों को छनन द्वारा अलग करता है।
(ज) रक्त से वर्ज्य पदार्थ कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन गैस के रूप में होता है। रक्त से नाइट्रोजन युक्त वर्ज्य पदार्थों का छनन तरल के रूप में होता है।

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